शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

आचरण


आचरण 

अगर कोयल को  कोई कौआ कह  दे तो इसमें कोयल को कोई फर्क नहीं पड़ता ,वह  कहने वाले की  मूर्खता को भी कोई भाव नहीं देती न हंसती है न रोती है न गुस्सा करती है और न ही उसे कुछ समझाने की कोशिश करती है। ....अपना जीवन जीती है और अपना कार्य करती है अपनी मधुर आवाज़ से कूकती है। …कोई उसकी कूक से खुश होता है और कोई उस पर क्रोधित होता है कोई ईर्ष्या करता है और कोई गर्व। ....लेकिन कोयल इन सब बातों से अप्रभावित ही रहती है और अपने कार्य में लिप्त हो अपना जीवन जीती है। …आनन्द से,गर्व से 

कोयल सा आचरण अपनाओ। ………

शनिवार, 11 जनवरी 2014

निकल गये तुम 
बहुत दूर 
लौट पाना 
नामुमकिन तो नहीं 
लेकिन मुश्किल 
है ज़रूर 



शनिवार, 4 जनवरी 2014

स्थिरता

 स्थिरता
कहा  किसी ने व्यर्थ है यह सब
कहा किसी ने केवल छल
कहे कोई यह मात्र कपट है
कहा  किसी ने केवल भ्रम
लकिन सच चाहे मत मानो
कठिन कार्य है यूं ही बहना
उलटी धारा में स्थिर रहना



नव वर्ष की शुभ कामनाएं

  नव वर्ष की शुभ कामनाएं  

हर बात उठे जज्बात लिए
हर काम नया अंदाज़ लिए
हर सोच मुकम्मिल हो सब की
हर दिशा नई आगाज़ लिए
हो सफल सभी प्रयत्न तेरे
मिले पग डगर सुमंगलमय
हो  विश्वास कर-कर्मो पर
अभिलाष जगे नव मंगल मय
 यह वर्ष भरे आलोकिकता
हर पल जगाय नयी चाह
पूर्ण करने को निज सपने
हर पल सजायो कर्मठता

                    

शनिवार, 2 नवंबर 2013

काला प्रकाश

काला  प्रकाश 

देखो सज्जित हुआ आकाश 
दीपावली के अद्भुत क्षण है 
पर धूमिल है उजला  प्रकाश 

आस एक जो टूटी बन कर 
प्यास एक जो तड़पी ठन कर 
क्षुधा बढ़ी और बिखरी मर कर 
सूखा एक पल्ल्वित पलाश

काल रात्रि डस  गयी खुशिया
निशीथ बन गया  काल का रक्षक
पाने को पल दो पल के अवसर 
रोंद गया मानव का मस्तक 

कुसुमित कर दे उजड़ी बगिया 
गुंजित कर दे वीराना 
रौशन कर दे जो जन मन को 
ऐसी लौ अब करो तलाश

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2013

आज का दिन , जीवन को  दे एक नयी प्रेरणा , एक नयी दिशा , एक नयी मंजिल।
खुशियों  से भरा यह दिन , यह साल और समस्त जीवन

जन्म दिवस की शुभ कामनाएं। …….
एवं ढेर सारा प्यार। …………।

शनिवार, 14 सितंबर 2013

वक्त

वक्त
वक्त बहता  ही रहा
 सरहदों को पार करता
बेसबब इतिहास गढ़ता
अनगिनत सुर्ख़ियों पर
बेजुबां  परिहास करता
वक्त बहता ही रहा

पकड़ने की कोशिशें
सब धूल में मिलती रही
अपनी ही नाकामियां
पर मुखर होती रही
कर के सिजदा वक्त का
जुल्म   यूं सहता रहा
वक्त बहता ही रहा

निष्फल नहीं होते प्रयतन
मंत्र यह बस साथ था
मुश्किलों के दौर में भी
साथ मेरा हाथ था
छू ही लूँगा अब तो मंजिल
पग निरंतर धरता  रहा
वक्त बहता ही रहा

चीर कर सीना वदन का
हर कदम आगे बढेगा
यह कभी रूकता नहीं है 
वक्त के संग दम बहेगा
ले संबल संकल्प  का
कर्म बस करता रहा
वक्त बहता ही रहा