सोमवार, 11 अप्रैल 2016


आज मेरे हर्ष एवं गर्व की कोई सीमा ही नहीं है एक मिश्रित अनुभूति हो रही है

एक ेमपलई होने के नाते--- फख़्र  होता है यह सोच कर की  इनकी लीडरशिप में काम करने का अवसर मिला

एक माँ होने के नाते गर्व महसूस करती हूँ और शाट शाट नमन करती हूँ उन म मत पिता को जिन्हो ने एैसी योग्य एम प्रतिभाशालिनी बच्चों को जन्म जिया एवं इतने गहरे संस्कार दिए

और सबसे बड़ी बात एक महिला होने के नाते गर्व महसूस करती हूँ की ऐसी महिला योगयताओं ने राष्ट्र निर्माण एवं उसकी अर्थव्यवष्टा  में बढ़ -चढ़ कर अपना योगदान दिया।  अपनी तथाकथित महिलाओं की सारी  सीमाओं  से बाहर निकल कर बिज़नेस जगत में  अपना अप्रतिमम स्थान बनाया  है।  श्री मरहोत्र जी स्वाप्पां को पूरा करने में भरसक , अथक प्रयत्नशील हैं


मेरा हार्दिक अभिनन्दन एवं शत शत  बधाई

आज उनको इस नए पद पर देख हम सब बहुत ही उत्साहित हैं एक सन्देश अपनी शुभ कामनाओं के साथ देना चाहूँ गी





बुधवार, 6 अप्रैल 2016


"जो नहीं पथ से  भटकता 
जो न उलझन में  अटकता 
पतझरों को चुभ रहा जो 
वह अनूठा शूल हूँ मैं "

इन पंक्तियों को  सार्थक करता उन   दो कर्मठ व्यक्तियों  ,माननीया मोनिका मल्होत्रा एवं सोनिका मल्होत्रा का सबल व्यक्तित्व जो अपने पथ प्रदर्शक युग पुरुष आदरणीय श्री अशोक कुमार मल्होत्रा जी एवं प्रेरणा स्त्रोत आदरणीया श्री मति सतीश बाला मल्होत्रा जी की प्रेरणा से प्रेरित हो अपने अथक श्रम से प्रगति पथ पर अग्रसरित हैं। 
आज सफलता पथ पर एक और सोपान चढ़ने की शत शत बधाई !

सोमवार, 14 मार्च 2016


जन्मदिवस की शुभ कामनाएं स्विष्टि ! तुम्हारे जमदिवस पर और तुम्हारे जीवन  के एक महत्वपूर्ण वर्ष के लिए विशेष सन्देश..... 

रविवार, 13 मार्च 2016

मिलन



मिलन 

मित्रों!  यह पंक्तियाँ मेरे  मित्रों के लिए जो इस जीवन  के प्रथम चरण  सफर में साथ चले  ,  परिस्थितियों  वश   अलग हुए और आज लगभग ३५  वर्षो के उपरान्त  पुनः मिल गये  अपनी अपनी मंजिल की ओर अग्रसर।  

कुछ मित्र मिले नए 
 कुछ मिल गए पुराने 
जीवन के पन्नो पर  
इतिहास को  दोहराने 

संघर्षो के साथी थे 
प्रमाण सफलता के 
पल पल बीते पल की 
स्मित को पहचाने 

कुछ वक्त गुज़ारा संग में 
कुछ ख्वाब  बुने थे मिलकर 
साकार किये वो सबने 
तंतु  से ताने -बाने 

वह आज भी जिन्दा है
हर भाव से मुखातिब
हर सांस में बसें वो
तकल्लुफ से अनजाने

बीत गया पल कितना 
जीवन बदला सारा 
हैं आज भी  हम बचपन में 
मित्र  बस तेरे बहाने 




शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

एक कदम



एक कदम 
इक कदम चला 

कदम कदम के साथ मिला
कदम कदम में कदम रचा
मंजिल दर मंजिल दर मंज़िल

कदम कदम कर  कदम चला
लो रचा फिर इतिहास नया
कदम कदम जब कदम बढ़ा

रविवार, 31 जनवरी 2016

एक नया युग सजाएं



कब जाना था यूं 
पीछे रह  जाएगी जिंदगी  
न आगे  देख पाएगी जिंदगी 
कब जाना था यूं 
इतना शोर होगा हादसों का 
कि  अपनी  भी आवाज़ 
न सुन पाएगी जिंदगी  

कब जाना था यूं 
हाथ छोड़ देगी जिंदगी 
मुहं मोड़ लेगी जिंदगी 
कब जाना था कि 
वक्त में  इतनी घुटन होगी 
कि अपनी ही सांस 
तोड़ देगी जिंदगी 

पिघलती दीवारें है 
दरकती मीनारे है 
ज्वाल के समुन्दर में 
बर्फ के किनारे है 

कौन जाने , क्या दिशा है
कौन जाने , क्या लिखा है
कौन जाने , क्या मंशा है
कौन जाने  , क्या  रचा  है

अचंभित हूँ फिर भी मैं 
धूप  के अंधेरों में 
नागमणि सी बाम्बियों में 
चमकती है जिंदगी  
एक सांस लेने  को 
तड़पती है जिंदगी 

चलो फिर मिल कर 
एक नया युग सजाएँ 
रह गया जो पीछे 
उसे वापिस बुलाये 
असमंजस के झरोखे से 
झांकती इस जिंदगी को 
आशा के झूले पर 
फिर से झूलायें 
एक नया युग सजाएं 

शनिवार, 19 दिसंबर 2015

वर्ष २०१५

वर्ष २०१५


वक्त बहे जाता है यारो
यादें अनुपम छोड़ कर
पलट कभी यह फिर न आये
मिलने किसी भी मोड़  पर
आज अभी है ,आज सभी है
जी बस  तुम जी भर कर
कहां गया ,कब आएगा
तज दो व्यर्थ का चिंतन
पल पल हाथ में है तेरे
जी लो बस तुम जे भर कर