जन्मदिवस की शुभ कामनाएं स्विष्टि ! तुम्हारे जमदिवस पर और तुम्हारे जीवन के एक महत्वपूर्ण वर्ष के लिए विशेष सन्देश.....
सोमवार, 14 मार्च 2016
रविवार, 13 मार्च 2016
मिलन
मिलन
मित्रों! यह पंक्तियाँ मेरे मित्रों के लिए जो इस जीवन के प्रथम चरण सफर में साथ चले , परिस्थितियों वश अलग हुए और आज लगभग ३५ वर्षो के उपरान्त पुनः मिल गये अपनी अपनी मंजिल की ओर अग्रसर।
कुछ मित्र मिले नए
कुछ मिल गए पुराने
जीवन के पन्नो पर
इतिहास को दोहराने
संघर्षो के साथी थे
प्रमाण सफलता के
पल पल बीते पल की
स्मित को पहचाने
कुछ वक्त गुज़ारा संग में
कुछ ख्वाब बुने थे मिलकर
साकार किये वो सबने
तंतु से ताने -बाने
हर भाव से मुखातिब
हर सांस में बसें वो
तकल्लुफ से अनजाने
बीत गया पल कितना
जीवन बदला सारा
हैं आज भी हम बचपन में
मित्र बस तेरे बहाने
शनिवार, 20 फ़रवरी 2016
एक कदम
एक कदम
इक कदम चला
कदम कदम में कदम रचा
मंजिल दर मंजिल दर मंज़िल
कदम कदम कर कदम चला
लो रचा फिर इतिहास नया
कदम कदम जब कदम बढ़ा
रविवार, 31 जनवरी 2016
एक नया युग सजाएं
कब जाना था यूं
पीछे रह जाएगी जिंदगी
न आगे देख पाएगी जिंदगी
कब जाना था यूं
इतना शोर होगा हादसों का
कि अपनी भी आवाज़
न सुन पाएगी जिंदगी
कब जाना था यूं
हाथ छोड़ देगी जिंदगी
मुहं मोड़ लेगी जिंदगी
कब जाना था कि
वक्त में इतनी घुटन होगी
कि अपनी ही सांस
तोड़ देगी जिंदगी
पिघलती दीवारें है
दरकती मीनारे है
ज्वाल के समुन्दर में
बर्फ के किनारे है
कौन जाने , क्या दिशा है
कौन जाने , क्या लिखा है
कौन जाने , क्या मंशा है
कौन जाने , क्या रचा है
अचंभित हूँ फिर भी मैं
धूप के अंधेरों में
नागमणि सी बाम्बियों में
चमकती है जिंदगी
एक सांस लेने को
तड़पती है जिंदगी
चलो फिर मिल कर
एक नया युग सजाएँ
रह गया जो पीछे
उसे वापिस बुलाये
असमंजस के झरोखे से
झांकती इस जिंदगी को
आशा के झूले पर
फिर से झूलायें
एक नया युग सजाएं
शनिवार, 19 दिसंबर 2015
वर्ष २०१५
वर्ष २०१५
वक्त बहे जाता है यारो
यादें अनुपम छोड़ कर
पलट कभी यह फिर न आये
मिलने किसी भी मोड़ पर
आज अभी है ,आज सभी है
जी बस तुम जी भर कर
कहां गया ,कब आएगा
तज दो व्यर्थ का चिंतन
पल पल हाथ में है तेरे
जी लो बस तुम जे भर कर
वक्त बहे जाता है यारो
यादें अनुपम छोड़ कर
पलट कभी यह फिर न आये
मिलने किसी भी मोड़ पर
आज अभी है ,आज सभी है
जी बस तुम जी भर कर
कहां गया ,कब आएगा
तज दो व्यर्थ का चिंतन
पल पल हाथ में है तेरे
जी लो बस तुम जे भर कर
नियति
नियति
प्यार को वार न माना मैंने
उत्कंठा जो जगे तो तब भी
क्या कर लोगे स्वीकार
जीवन क्या है, कोरा तप है
सुख दुःख छाया धूप का मिश्रण
सम भावों से करता आया
जिजिवषा का अंगीकार
पल प्रति पल जीवन की आशा
व्याकुल अद्भुत मन अभिलाषा
प्राकृत अनुपम संगम से उत्पन
प्रकृति का उपकार
सार समय का जाना मैंने
जीवन जीत है माना मैंने
रोम रोम में व्याप्त हुआ जब
रिक्तता का यह उपहार
अंदाज़ निराला है
वाह रे दोस्त !,तेरा अंदाज़ निराला है
जाने कितने गमो को सीने में पाला है
मुस्कानी धागों के वस्त्र बनाता है
जगह जगह दर्दो पे पैबंद लगाता है
दुखों के कैकटस उगा कर मन में
चेहरे पे जूही के फूल खिलाता है
वाह रे दोस्त !,तेरा अंदाज़ निराला है
जाने कितने गमो को सीने में पाला है
अस्मानी रूहों के शख्स बनाता है
तरह तरह नामो के साथ बिठाता है
एक नाम जो उसकी सांसो में बसा है
हर रूह को उसके साथ मिलाता है
वाह रे दोस्त !,तेरा अंदाज़ निराला है
जाने कितने गमो को सीने में पाला है
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